डिजिटल सफाई में चमकता नगर निगम अयोध्या

  • महात्मा गांधी वार्ड में गंदगी का राज.
  • डिजिटल सफाई में चमकता नगर निगम अयोध्या.
  • आख्या रिपोर्टों में साफ़.
  • जमीनी हकीकत में कीचड़ ही कीचड़.!

महात्मा गांधी के नाम पर देश भर में स्वच्छता की मुहिम शुरू हुई, लेकिन नगर निगम अयोध्या के महात्मा गांधी वार्ड की हकीकत इस मुहिम को मुंह चिढ़ा रही है..

अयोध्या। कौशल पुरम कॉलोनी में रहने वाले एक नागरिक ने लगातार शिकायत की कि उनके घर के सामने नालियां महीनों से साफ नहीं हुई हैं। 

अब हाल यह है कि नालियां पूरी तरह जाम हैं, गंदा पानी उफान मारते हुए सड़कों पर बह रहा है और कीचड़ से रास्ते लथपथ हैं।

शिकायतकर्ता ने जब वार्ड का नेतृत्व करने वालों से कई बार शिकायत की नगर निगम में भी एप्लीकेशन लिखकर शिकायत की लेकिन कोई कार्यवाही न होते देखी, तो मुख्यमंत्री पोर्टल पर गुहार लगाई। लेकिन जवाब में जो ‘आख्या रिपोर्ट’ लगी, वह हैरान करने वाली थी—बिना किसी निरीक्षण या कार्रवाई के समस्या का समाधान दिखा दिया गया। यानी कंप्यूटर स्क्रीन पर सब ठीक, लेकिन ज़मीनी सच्चाई — चारों ओर गंदगी और बदबू का बोलबाला।

विडंबना यह है कि जिस महापुरुष के नाम से इस वार्ड को पहचाना जाता है, उसी के नाम पर यह सबसे ज्यादा उपेक्षित बना हुआ है। 

न तो सफाईकर्मी झांकने आते हैं, न ही नगर निगम के अधिकारी। शिकायतें दर्ज होती हैं, डिजिटल फाइलें बंद होती हैं, और गंदा पानी नागरिकों के दरवाज़े तक पहुंचता है।

ऐसी दर्जनों शिकायतें जनसुनवाई पोर्टल पर मौजूद हैं, जहां समस्या को बिना जांच के 'निस्तारित' दिखा दिया गया है। जनता की पीड़ा को रिपोर्टों की भाषा में ‘ठीक’ बता देना, केवल व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाता, बल्कि जनता के विश्वास पर भी सीधा प्रहार करता है।

अब देखना यह है कि नगर निगम अयोध्या के उच्चाधिकारी इस डिजिटल दिखावे पर कोई ज़मीनी कदम उठाते हैं या फिर इस गंदगी को 'क्लीन' बता देने का खेल यूं ही चलता रहेगा।

जब तक समस्या रिपोर्टों में नहीं, जमीन पर हल नहीं होगी — तब तक ‘स्वच्छ भारत’ का सपना महज़ विज्ञापन की तरह ही रहेगा।

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