वास्तविक सेवा वही है, जो संकट में की जाए -रवि सिंह

विशेष संवाददाता

लखनऊ। कोरोना महामारी के कठिन दौर में जब लोग अपने घरों में सुरक्षित रहने की कोशिश कर रहे थे, उसी समय नगर निगम लखनऊ के सुपरवाइजर रवि सिंह ने निस्वार्थ भाव से समाज सेवा का बीड़ा उठाया। उनकी यह सेवा भावना आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। रवि सिंह बताते हैं कि उन्हें समाज सेवा की प्रेरणा अपने माता-पिता से मिली, जिन्होंने बचपन से ही उन्हें ‘परहित सरिस धर्म नहीं भाई’ जैसे मूल्यों की शिक्षा दी। 

कोरोना के शुरुआती दौर में जब शहर में अफरा-तफरी का माहौल था, तब उन्होंने देखा कि कई बुजुर्ग, दिव्यांग और गरीब परिवार भोजन और दवाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसी मानवीय पीड़ा ने उनके अंदर कुछ कर गुजरने का संकल्प पैदा किया।

नगर निगम की ड्यूटी के साथ-साथ रवि सिंह ने अपने निजी संसाधनों और साथियों की मदद से जरूरतमंदों तक राशन, मास्क, सैनिटाइज़र और जरूरी दवाइयाँ पहुँचाना शुरू किया। उन्होंने स्वयं कई कंटेनमेंट जोन में जाकर सफाई कार्यों की निगरानी की और स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराया।

रवि सिंह कहते हैं, "वास्तविक सेवा वही है जो संकट में की जाए। उस समय सिर्फ ड्यूटी नहीं, इंसानियत बोल रही थी।" उनकी सेवाओं के लिए कई सामाजिक संगठनों ने उन्हें सम्मानित भी किया। 
आज भी वे नियमित रूप से सफाई कर्मचारियों और जरूरतमंदों की मदद में सक्रिय रहते हैं।

रवि सिंह का यह सेवा भाव बताता है कि जब नीयत साफ और मन में दूसरों के लिए दर्द हो, तो कोई भी व्यक्ति समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।

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